यहां हर रोज सुबह शहीद बेटे की प्रतिमा पर ममता बरसाती है मां

जशपुरनगर- नक्सलियों से लोहा लेते हुए बस्तर में शहीद हुए अपने इकलौते बेटे की शहादत से व्यथित एक मां ने अपने बेटे की स्मृति को जीवित रखने के लिए उसकी प्रतिमा स्थापित करने की ठान ली। बेटे के प्रति मां के इस असीम प्रेम को देखकर पिता ने घर के बगल में स्वयं के खर्चे से मंडप तैयार कर बेटे की आदमकद प्रतिमा स्थापित कर दी। इस प्रतिमा में प्रतिदिन शहीद की मां उसी तरह ममता लुटाती है,जैसे वह बचपन अपने बेटे पर लुटाया करती थी। इस ममत्व के इस मार्मिक दृश्य को देखने वालों की आंखें आज भी बरबस झलक पड़ती है।जिला पुलिस बल के शहीद कांस्टेबल बसील टोप्पो के पिता निर्मल टोप्पो ने  बताया कि जशपुर जिले के पुरसाबहार तहसील के एक छोटे से गांव पेरूवांआरा में जन्मा बसील,बचपन से ही सेना और पुलिस भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था। हायर सेकेण्डरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद बसील ने जिला पुलिस में भर्ती हो गया। उसे पहली पोस्टिंग घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर के बीजापुर में मिला था।उन्होनें बताया कि वर्ष 2011 में बसील की पोस्टिंग बीजापुर के भद्रकाली पुलिस थाने में की गई थी। अगस्त 2011 में वह 15 दिन की छुट्टी लेकर अपने घर पेरूवांआरा आया था, लेकिन एक सप्ताह घर में रहने के बाद वह अचानक छुट्टी खत्म होने से पहले ही हेडक्वार्टर जाने के लिए तैयार होकर घर से बीजापुर जाने के लिए निकल गया। बीजापुर में ज्वाइनिंग देने के बाद बसील 19 अगस्त 2011 को अपने 11 साथियों के साथ भोपालपट्टनम से भद्रकाली कैंप राशन लेकर जा रही एक ट्रैक्टर पर सवार हो गया। भोपालपट्टनम थाना क्षेत्र के दीपला गांव के जंगल में नक्सलियों ने घात लगाकर इस ट्रैक्टर को निशाना बनाया।बारूदी सुरंग का इस्तेमाल कर वाहन को उड़ाने के बाद घात लगाए हुए नक्सलियों ने घायल जवानों पर अंधाधुंध पुायरिंग की थी। इस नक्सल हमले में बसील और उनके तीन साथी शहीद हुए थे। बसील के शहीद होने की खबर सुनकर उसकी मां सफियामा टोप्पो पूरी तरह से पत्थरा गई थी। अंतिम संस्कार के दौरान रो-रो कर उसका बुरा हाल हो गया था। बेटे के शव को देखने के बाद भी वह उसके दूर जाने को स्वीकार नहीं कर पा रही थी। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया निबटने के बाद सपिुयामा ने अपने शहीद बेटे की प्रतिमा बनाने की ठान ली।अपने इरादे को उसने पति निर्मल टोप्पो को बताया। कुछ दिनों तक मां की भावनात्मक लगाव से उत्पन्न् इच्छा समझ कर निर्मल टोप्पो ने दिलासा देकर पत्नी को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी सफियामा नहीं मानी तो बेटे के प्रति एक मां के असीम स्नेह का अहसास हुआ। उन्होनें अपनी पत्नी की इच्छा पूरी करने का निर्णय लिया और मूर्तिकार के तलाश में निकल गए। काफी तलाश करने के बाद निर्मल ने ओडिसा के मूर्तिकारों की मदद से मूर्ति बनाने का काम शुरू किया।मूर्ति बनता हुआ देख कर मां सफियामा एक बार पिुर भावुक हो गई। मां की ममता को यह हरगिज गवारा नहीं था कि वह घर में आराम से सोए और उसका बेटा खुले आसमान में मौसम की मार झेलता रहे। सफियामा ने एक बार पिुर पति से बेटे की प्रतिमा के लिए मंडप निर्माण कराने की मिन्न्त की। मां और बेटे के इस असीम स्नेह का सम्मान करते हुए बसील के पिता ने अपनी पत्नी की इस इच्छा को भी पूरी की। वीर जवान बसील के शहादत के तकरीबन एक साल बाद मां के आंखों के सामने उसका बहादुर बेटा पुलिस की वर्दी में हाथों में बंदूक लिए उसके सामने खड़ा हुआ था।सीना ताने दुश्मनों को चुनौती देते हुए खड़े हुए बेटे की इस प्रतिमा पर मां पिछले 8 साल से ममता लुटा रही है। रोज सुबह उठ कर सफियामा, बसील की प्रतिमा की उसी प्रकार देखभाल करती है, जैसे कोई मां अपने छोटे बच्चे की करती है। बसील के शहादत के आठ साल गुजरने के बाद भी मां की ममता कम नहीं हुई है। स्थानीय ग्रामीणों का भी अपने गांव के शहीद जवान बसील से लगाव देखते ही बनता है। यहां हर साल राखी के दिन बहनें सबसे पहले इस शहीद जवान की प्रतिमा की कलाई में राखी बांधती है,इसके बाद अपने भाईयों के हाथ पर रक्षा सूत्र सजाती है। शहीद जवान की वीरता को जीवंत रखने के लिए गांव में बसील के नाम पर खेल प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाता है।

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