वीडियो देखें:लॉकडाउन में फंसे मज़दूरों के बच्चे मुस्कुराए, जब देखा पुलिस अफसर का यह रूप

दुर्ग।कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे भारत में लॉक डाउन चल रहा है। देशभर के अलग-अलग राज्यों से आपने ऐसी कई तस्वीरें देखी होंगी,जिसमें बेवजह सड़कों पर घूम रहे लोगों के खिलाफ पुलिस सख्ती करती हुई नजर आई होगी,तो कुछ तस्वीरें ऐसी भी देखी होंगी जिसमें सड़कों पर निकल पड़े मजदूरों को पुलिस के द्वारा भोजन कराया जा रहा है। छत्तीसगढ़ पुलिस के द्वारा भी लॉक डाउन के दौरान केंद्र सरकार के द्वारा जारी दिशा निर्देशों के तहत लोगों को समझा-बुझाकर लॉक डाउन के नियमों का पालन कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इस वक्त सबसे बड़ी समस्या है वह मजदूर जो लॉक डाउन के कारण अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मध्यप्रदेश

के दमोह के रहने वाले 25 मजदूरों के एक परिवार का ख्याल भी पुलिस प्रशासन द्वारा रखा जा रहा है। इस दौरान एक मार्मिक तस्वीर भी सामने आई ,जो पुलिस की एक अलग ही भूमिका को बयान

करती है.. दुर्ग के कुम्हारी इलाके में पदस्थ थाना प्रभारी आशीष यादव का एक वीडियो सोशल नेटवर्किंग पर जबरदस्त वायरल हो रहा है जिसमें वह लॉक डाउन के दौरान फंसे हुए परेशान मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चों का दिल बहलाते हुए नजर आ रहे हैं। उस वीडियो में वह बच्चों और उनके माता-पिता का मनोबल बढ़ाते हुए नजर आ रहे हैं ,जिसमें वह कह रहे हैं कि बच्चे जल्दी अपने घर पहुंच जाएंगे। आमतौर पर पुलिस वालों की कड़क छवि के विपरीत उनकी यह कार्यशैली लोगों को काफी प्रभावित कर रही है। पूछे जाने पर पुलिस अधिकारी आशीष यादव ने बताया कि दमोह का रहने वाला यह मजदूर परिवार दुर्ग में काम की तलाश में आया हुआ था ,लेकिन लोगों की वजह से वह यहां फस गया है शासन प्रशासन की मदद से उन्हें वापस उनके घर भेजने की व्यवस्था की जा रही है।लेकिन परिवार में छोटे बच्चे और महिलाएं बुजुर्ग सभी हैं ।उनका मानसिक संभल बढ़ाना भी जरूरी है ताकि वह विपरीत परिस्थितियों में अपने आप को संभाल सकें और उम्मीद ना खोए इसीलिए वह दिन में कम से कम एक बार फंसे हुए मजदूरों से मुलाकात करके उन्हें समझाते हैं।और प्यार से बात करने की कोशिश करते हैं ताकि उन्हें अपनापन महसूस हो । वाकई में यह अपने आप में एक मिसाल कायम करने वाली खबर है और यह जरूरी भी है कि देश भर में तमाम पुलिस के अफसर और जवान अपने कड़क रूप के साथ ही मजबूरी में फंसे हुए मजदूरों को शासन के द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं से अलग, खुद के प्रयासों से भी उनका मनोबल बढ़ाने की दिशा में प्रयास करें।

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