चपरासी की बेटी बनी एक दिन की एसडीएम, 12 फाइलें भी निबटाई

शिमला, 13 जून 2020। नायक फिल्म में एक दिन का मुख्यमंत्री आपने देखा होगा…सीएम बने अनिल कपूर किस कदर धड़ाधड़ फैसले लेते हैं। लेकिन, रील लाइफ की जगह रियल लाइफ में एक ऐसा ही नजारा कांगड़ा में दिखा, जब एक चपरासी की बेटी एक दिन की एसडीएम बनीं और उसने दर्जन भर से अधिक फैसले भी दिए।
दरअसल, कांगड़ा की एसडीएम की बेटी दसवीं बोर्ड में 94 फीसदी अंक लाकर मेरिट में आई थी। सो, कांगड़ा के एसडीएम ने उसे सम्मानित करने के लिए एक दिन के लिए अपनी कुर्सी पर बैठा दी। एसडीएम जतिन लाल का कहना है कि मेधावी बेटी को सम्मानित करने का इससे अच्छा कोई मौका नहीं हो सकता था।

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जीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल कांगड़ा में शिक्षा बोर्ड की 10वीं की मेरिट लिस्ट में 34वां स्थान पाने वाली हिना सुबह 11 बजे से एसडीएम कांगड़ा की कुर्सी पर बैठ गईं। हिना ने शाम साढ़े पांच बजे तक कामकाज एसडीएम जतिन लाल के मार्गदर्शन में संभाला। हिना ने दफ्तर के कर्मचारियों की बैठकें लीं, पूरे दिन के कामकाज की रूपरेखा बनाई। दफ्तर में समस्याएं लेकर आने वाले लोगों की शिकायतें निपटाईं। एक जमीन विवाद का मामला लंबे अरसे से एसडीएम कोर्ट में चल रहा था। केस में हिना ने अपनी राय दी और एसडीएम जतिन लाल ने हिना के फैसले को मॉडिफाई करके अंतिम फैसला सुना दिया।

हिना ने बताया कि एसडीएम की कुर्सी पर बैठकर बहुत गर्व अनुभव किया। यह उनके लिए सपने की तरह था। एसडीएम सर ने मुझे आईएएस अफसर बनने का सपना दिखाया है, मैं उसे पूरा करूंगी। हिना ने कहा कि आईएएस अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए बनते हैं। मेरा मानना है कि अवसर, शब्द और समय कभी वापस नहीं आते हैं। हिना ठाकुर के पिता तोता राम ने कहा कि एसडीएम जतिन लाल ने बहुत बड़ा कार्य किया है।

एसडीएम जतिन लाल ने बताया कि मुझे मेरे दफ्तर के चपरासी ने बताया था कि उसकी बेटी ने दसवीं में 94 फीसदी अंक लिए हैं। मैंने सोचा कि बेटी को सम्मानित करूं। मैंने हिना को सम्मानित करने के लिए उसे दफ्तर बुलवाया। हिना ने कहा कि मैं आईएएस अफसर बनना चाहती हूं। फिर मैंने सोचा कि हिना को एक दिन की एसडीएम बनाऊं। ऐसा करने का मेरा मकसद बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान को बढ़ावा देना है, ताकि देश की हर बेटी अपराजिता बने।